रांची न्यूज डेस्क: रांची की अलग-अलग अदालतों ने शुक्रवार को दुष्कर्म और एनडीपीएस से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। दो दुष्कर्म मामलों में दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि साक्ष्यों के अभाव में दो अन्य मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया।
पहले मामले में अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने दुष्कर्म के दोषी एतवा केरकेट्टा को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर उसे छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने और उसके पुनर्वास के लिए डालसा को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अभियोजन के अनुसार, 25 जून 2021 की रात आरोपी ने अपने रिश्ते की महिला के घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले में 27 जून 2021 को मांडर थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। सुनवाई के दौरान सात गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
दूसरे मामले में अपर न्यायायुक्त अमित शेखर की अदालत ने नर्सिंग छात्रा से दुष्कर्म के दोषी राहुल कुमार यादव को भी 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के मुताबिक, पीड़िता महादेवी बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में जीएनएम की छात्रा थी, जबकि आरोपी उसी संस्थान की बस में सहायक चालक (खलासी) था। आरोपी पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने और आपत्तिजनक तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने का आरोप था। अदालत ने उसे 25 जुलाई को दोषी ठहराया था।
वहीं, अपर न्यायायुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने ऑब्जर्वेशन होम में गांजा और अन्य प्रतिबंधित सामग्री फेंकने के मामले में रामजी सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त गवाह और सबूत पेश नहीं कर सका।
इसी तरह अपर न्यायायुक्त एसएन तिवारी की अदालत ने 1691.34 किलोग्राम डोडा बरामदगी से जुड़े एनडीपीएस मामले में बिरसा पूर्ति को भी साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया।