रांची न्यूज डेस्क: राजधानी रांची में लगातार गिर रहे भू-जलस्तर और गर्मियों में होने वाले जल संकट को देखते हुए रांची नगर निगम ने बोरिंग कराने के नियम कड़े कर दिए हैं। अब किसी घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में बोरिंग कराने से पहले नगर निगम से अनुमति लेना जरूरी होगा। बिना अनुमति बोरिंग कराने पर आवासीय मामलों में 25 हजार रुपये और व्यावसायिक मामलों में एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही बोरिंग मशीन को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
आवेदन के साथ देने होंगे ये दस्तावेज, रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी जरूरी
नगर निगम ने नई व्यवस्था को लेकर आम सूचना जारी की है। बोरिंग की अनुमति के लिए आवेदक को पहचान पत्र, होल्डिंग रसीद और बोरिंग स्थल की जीपीएस फोटो के साथ आवेदन करना होगा। अगर बोरिंग किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में कराई जा रही है तो उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे। निगम ने बोरिंग वाले भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को भी अनिवार्य कर दिया है। आवेदन के साथ इसकी मौजूदा स्थिति की फोटो और शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में यह साफ करना होगा कि बोरिंग निजी जमीन पर ही कराई जाएगी।
मंजूरी के 15 दिन के अंदर बोरिंग जरूरी, गहराई भू-जलस्तर के हिसाब से तय होगी
नगर निगम से अनुमति मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर बोरिंग कराना जरूरी होगा। तय समय में काम नहीं कराने पर अनुमति अपने आप रद्द मानी जाएगी। बोरिंग की गहराई इलाके के भू-जलस्तर को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। बोरिंग पूरी होने के बाद उसकी गहराई और जलस्तर की माप से जुड़ी जानकारी रिंग मशीन चालक और मकान मालिक को नगर निगम के पास जमा करनी होगी। घरेलू इस्तेमाल के लिए अधिकतम चार इंच तक की बोरिंग की ही अनुमति मिलेगी। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू हालत में होना भी जरूरी रहेगा।
बोरिंग के लिए कितना देना होगा शुल्क?
नगर निगम ने आवासीय और व्यावसायिक बोरिंग के लिए अलग-अलग अनुमति शुल्क तय किया है। आवासीय भवन में 5000 वर्गफीट तक के बिल्डअप एरिया के लिए 2500 रुपये और 5000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्र के लिए 5000 रुपये शुल्क देना होगा। वहीं, व्यावसायिक जल उपयोग के लिए 1000 वर्गफीट तक के क्षेत्र में बोरिंग कराने पर 10 हजार रुपये शुल्क लगेगा। 1000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्र के लिए 10 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से शुल्क लिया जाएगा। निगम का कहना है कि बोरिंग को रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़ने का मकसद भू-जलस्तर को बनाए रखने में मदद करना है।