रांची न्यूज डेस्क: बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के अवदाब (डिप्रेशन) में बदलकर दक्षिण झारखंड पहुंचने के बाद राज्य में व्यापक बारिश हुई है। इसके चलते झारखंड में मानसून की बारिश का घाटा 30 जून तक के 54 प्रतिशत से घटकर 5 जुलाई तक 42 प्रतिशत रह गया है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि सामान्य वर्षा के स्तर तक पहुंचने के लिए अभी और ऐसे मौसम तंत्रों की जरूरत होगी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची केंद्र के अनुसार, दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तरी ओडिशा के आंतरिक क्षेत्रों पर बना अवदाब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। सोमवार सुबह 8:30 बजे इसकी स्थिति ओडिशा के राउरकेला से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व, रांची से 70 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपश्चिम, छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर से 100 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व और डाल्टनगंज से 180 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में दर्ज की गई। अगले 24 घंटों में इसके झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के हिस्सों से गुजरने की संभावना है।
रांची मौसम केंद्र के वैज्ञानिक एवं उपनिदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में वर्षा की कमी 54 प्रतिशत से घटकर 42 प्रतिशत हो गई है, लेकिन बारिश की भरपाई के लिए आने वाले दिनों में और निम्न दबाव के क्षेत्र तथा डिप्रेशन बनने जरूरी होंगे।
मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए धनबाद समेत उत्तर-पूर्वी और मध्य झारखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली, गरज के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया है। बुधवार को भी उत्तर-पूर्वी जिलों में ऐसे ही मौसम की संभावना जताई गई है, जबकि गुरुवार और शुक्रवार को कुछ स्थानों पर बारिश और वज्रपात की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। विभाग का कहना है कि गुरुवार से बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आ सकती है।
सोमवार को सरायकेला-खरसावां जिले के निमडीह में राज्य में सबसे अधिक 79.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वहीं, डाल्टनगंज 35.4 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ सबसे गर्म स्थान रहा, जबकि लातेहार में न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 23.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।