झारखंड समेत देशभर के स्कूलों में आपदा सुरक्षा का बनेगा एक समान ढांचा? एनडीएमए ने प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय को भेजा

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Posted On:Monday, October 26, 2026

रांची न्यूज डेस्क: झारखंड समेत देश के अलग-अलग राज्यों के स्कूलों में आपदा से निपटने और आपात स्थिति में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक समान राष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की मांग उठी है। इसके तहत स्कूलों में समय पर चेतावनी देने, बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने, आपदा प्रबंधन टीम बनाने, सीपीआर और जीवन बचाने की ट्रेनिंग देने के साथ नियमित मॉक ड्रिल कराने पर जोर दिया गया है। इसका मकसद किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कदम उठाकर विद्यार्थियों की जान बचाना है।

रांची के सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा ने इस संबंध में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को प्रस्ताव भेजकर सरकारी, निजी और अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम आपदा सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था बनाने की मांग की थी। उन्होंने 31 अगस्त को ईमेल के जरिए अपने सुझाव भेजे थे। इस पर एनडीएमए के अवर सचिव एसके शर्मा ने 25 सितंबर को पत्र जारी कर बताया कि प्रस्ताव पर ध्यान दिया गया है और आगे की उचित कार्रवाई के लिए इसे शिक्षा मंत्रालय के पास भेज दिया गया है।

नेपाल की घटना से मिली सीख

प्रस्ताव में नेपाल में बाढ़ के दौरान समय रहते कदम उठाए जाने से करीब 1,600 विद्यार्थियों की जान बचने की घटना का उदाहरण दिया गया है। इसमें बताया गया है कि समय पर चेतावनी मिलने, बच्चों को बाहर निकालने की स्पष्ट योजना और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी से बड़े हादसों को टाला जा सकता है। भारत में बाढ़, भूकंप, आकाशीय बिजली, चक्रवात और आग जैसी घटनाओं के खतरे को देखते हुए स्कूलों में पहले से सुरक्षा की तैयारी करना जरूरी है।

हर स्कूल में तैयार होगी आपदा से निपटने की योजना

प्रस्ताव में कहा गया है कि हर स्कूल को अपने इलाके में मौजूद खतरों के हिसाब से आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निकासी की योजना बनानी चाहिए। बाढ़, भूकंप, आग और खराब मौसम जैसी अलग-अलग स्थितियों से निपटने के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय होनी चाहिए। साथ ही, जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के जरिए स्कूलों तक आपातकालीन चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है।

आपात स्थिति में बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने का फैसला कौन करेगा, निकासी के लिए कौन-सा रास्ता अपनाया जाएगा और बच्चों को सुरक्षित जगह पर कहां इकट्ठा किया जाएगा, यह पहले से तय होना चाहिए। इसके अलावा, हर स्कूल में जिम्मेदारियां बांटकर एक आपदा प्रबंधन टीम बनाने पर भी जोर दिया गया है।

शिक्षकों को सीपीआर ट्रेनिंग और नियमित मॉक ड्रिल

प्रस्ताव के मुताबिक, शिक्षकों और स्कूल के संबंधित कर्मचारियों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इससे हृदय गति रुकने जैसी स्थिति में मेडिकल मदद पहुंचने तक शुरुआती जीवनरक्षक सहायता दी जा सकेगी।

स्कूलों में नियमित मॉक ड्रिल कराने से सुरक्षा व्यवस्था की कमियों का पता लगाने और उन्हें समय रहते दूर करने में मदद मिलेगी। इससे विद्यार्थी और कर्मचारी आपदा के दौरान घबराने के बजाय तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकेंगे।


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