रांची न्यूज डेस्क: मानसून के दस्तक देते ही झारखंड की राजधानी रांची में मच्छरजनित बीमारियों—विशेषकर डेंगू और मलेरिया—समेत अन्य मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। राज्य में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच मलेरिया के 16,728 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं केवल जून महीने में डेंगू के 77 मरीजों की पुष्टि हुई, जिनमें से अकेले रांची में 27 मामले दर्ज किए गए। बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने टास्क फोर्स का गठन कर निगरानी और नियंत्रण अभियानों को तेज करने के निर्देश जारी किए हैं।
रांची में स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम द्वारा चलाए जा रहे घर-घर जांच अभियान में चिंताजनक तस्वीरें सामने आई हैं। हाल ही में शहर के 7 वार्डों के 166 घरों में की गई जांच के दौरान 29 घरों में डेंगू के लार्वा पाए गए। ये लार्वा मुख्यतः कूलरों, पानी की टंकियों, गमलों और पुराने टायरों में जमा पानी में पनप रहे थे। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग नागरिकों से सप्ताह में एक दिन ‘ड्राई डे’ मनाने और घरों के आसपास जलजमाव न होने देने की लगातार अपील कर रहा है।
RIMS में मरीजों का भारी दबाव
ओपीडी में उमड़ती भीड़: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) में मरीजों का दबाव चरम पर है। अगस्त माह के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 3 अगस्त को 2,646, 4 अगस्त को 2,501 और 5 अगस्त को 2,264 मरीज ओपीडी पहुंचे।
इमरजेंसी और आईपीडी की स्थिति: 11 अगस्त को ओपीडी में 2,270 मरीजों के अलावा 260 नए मरीज भर्ती (IPD) किए गए और 274 मरीज इमरजेंसी सेवा में पहुंचे। जुलाई के दौरान भी रोजाना औसतन 2,200 से 3,000 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे थे।
विशेषज्ञ और जांच सुविधाएं: रिम्स में बढ़ते भार से निपटने के लिए मेडिसिन, शिशु रोग, त्वचा, ईएनटी, चेस्ट यूनिट, ईसीजी और टीकाकरण सेवाएं पूरी तरह सक्रिय रखी गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी जिलों के सिविल सर्जनों को त्वरित कार्रवाई बल तैनात करने, 108 एंबुलेंस सेवाओं को अलर्ट पर रखने और अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।