रांची न्यूज डेस्क: झारखंड में जेपीएससी परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितता समेत अपनी दूसरी मांगों को लेकर छात्र पिछले 20 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन के बीच दो भाइयों की कहानी सामने आई है, जिसमें एक भाई पुलिस की ड्यूटी कर रहा है, जबकि दूसरा अपने हक के लिए प्रदर्शन कर रहा है।
लाठीचार्ज के दिन आमने-सामने आने का डर
10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया था। इसी दिन कई पुलिसकर्मियों की ड्यूटी आंदोलनकारियों के सामने लगाई गई थी। प्रदर्शनकारी छात्र ने बताया कि उसका भाई भी उस दिन पुलिस की ड्यूटी पर था।
उसने भावुक होकर कहा कि अगर दोनों भाई आमने-सामने आ जाते तो स्थिति बहुत मुश्किल होती। उसका कहना था कि अगर भाई को उसे रोकने का आदेश मिलता तो वह क्या करता और वह खुद अपने भाई के सामने से कैसे हटता।
आंदोलन से कुछ छात्र अपने घर लौट चुके हैं, लेकिन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अब भी कई छात्र धरने पर बैठे हैं। जब उनसे पूछा गया कि कई लड़कियां घर लौट गई हैं और क्या उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर लग रहा है, तो छात्रों ने कहा कि सरकार के रवैये को देखकर उनके परिवार वाले जरूर डरे हुए हैं।
परिवार वाले कहते हैं- हक के लिए लड़ो, लेकिन अपना ध्यान रखो
एक प्रदर्शनकारी छात्र ने बताया कि उनके माता-पिता सरकार की कार्रवाई को देखकर चिंतित हैं। परिवार वालों का कहना है कि सरकार मांगें नहीं मान रही है, इसलिए अपने हक के लिए लड़ो, लेकिन अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखो और ज्यादा शोर-शराबा मत करो।
आधी रात को धमकाने का आरोप
एक प्रदर्शनकारी छात्रा ने आरोप लगाया कि आधी रात को छात्रों को जिस तरह से धमकाया जा रहा है, वह गलत है। उसने कहा कि जब छात्र सो रहे हों, उस समय इस तरह की कार्रवाई करना समझ से बाहर है।
छात्रा ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आखिर छात्रों को डराने की कोशिश क्यों की जा रही है। क्या सरकार खुद डर गई है, इसलिए आंदोलनकारियों को डराया जा रहा है?
'ये कोई असामाजिक तत्वों का प्रदर्शन नहीं है'
एक अन्य प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि यह कोई ऐसा प्रदर्शन नहीं है, जिसमें असामाजिक तत्व शामिल हों। उसके मुताबिक यह पूरी तरह जायज मांगों को लेकर किया जा रहा आंदोलन है।
उसने कहा कि आंदोलन में बिहार और झारखंड के छात्र शामिल हैं। उनके माता-पिता ने बचपन से उन्हें बड़ों और पुलिसकर्मियों से सम्मान से बात करना सिखाया है। छात्र ने बताया कि उसके पिता भी पुलिस में हैं और जिस तरह वह अपने पिता से बात करता है, उसी तरह पुलिसकर्मियों के साथ भी व्यवहार करता है। उसने कहा कि छात्रों ने पुलिस के लिए कभी गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।
किसी के पिता तो किसी के भाई पुलिस में
आंदोलन में ऐसे भी कई छात्र हैं, जिनके परिवार के सदस्य पुलिस में हैं। किसी के पिता पुलिस में हैं तो किसी के भाई सब इंस्पेक्टर हैं।
वनमाली नाम के एक छात्र ने बताया कि जिस दिन छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, उस दिन उसके भाई की भी ड्यूटी लगी थी। उसने कहा कि अगर उस दिन दोनों भाई आमने-सामने आ जाते तो पता नहीं क्या होता।
उसने कहा कि बैरिकेड के एक तरफ प्रदर्शनकारी भाई और दूसरी तरफ पुलिस की ड्यूटी कर रहा भाई खड़ा हो, तो वह पल किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता।
'आदेश मिलता तो भाई को लाठी चलानी ही पड़ती'
वनमाली ने कहा कि अगर ऐसी स्थिति आती तो दोनों भाइयों के पास आंसुओं के अलावा शायद कुछ नहीं होता। न उसका भाई उस पर लाठी चला पाता और न वह वहां से हट पाता।
उसने भावुक होकर कहा कि भाई अपने ही भाई को लाठी कैसे मार सकता है। लेकिन अगर पुलिसकर्मी भाई को ऊपर से आदेश मिलता, तो उसे ड्यूटी निभानी ही पड़ती। छात्र ने कहा कि उनकी मांग गलत नहीं है, वे सिर्फ अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।
उसने साफ कहा कि छात्र पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जब उनकी मांग गलत नहीं है और यह उनका अधिकार है, तो वे आंदोलन जारी रखेंगे।
'उम्र निकल रही है, परीक्षा नहीं दे पा रहे तो जिम्मेदारी किसकी?'
एक भावुक छात्र ने अपनी उम्र को लेकर भी सवाल उठाया। उसने कहा कि उसकी उम्र 35 साल से ज्यादा हो चुकी है और अब तक वह सिर्फ तीन बार जेपीएससी मेन्स की परीक्षा दे पाया है।
उसने कहा कि अगर समय पर परीक्षाएं होतीं तो 35 साल की उम्र तक वह कम से कम 10 बार परीक्षा दे सकता था। उसके मुताबिक उसने अपनी जिंदगी के 10 साल जेपीएससी की तैयारी में लगा दिए हैं।
छात्र ने कहा कि अब उम्र निकल रही है और जल्द ही वह इस प्रतियोगिता से बाहर हो जाएगा। उसने सवाल किया कि इतने साल की पढ़ाई, परीक्षाएं और इंटरव्यू देने के बाद अगर उसे मौका नहीं मिलता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। उसने पूछा कि जो मेहनत उसने की और जो परीक्षाएं उसने दीं, क्या उसका कोई प्रमाण उसे मिलेगा?