रांची न्यूज डेस्क: रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक व गड़बड़ियों के विरोध में पिछले एक सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मंगलवार को जांच किसी स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जांच झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों के पैनल या सीबीआई को सौंपी जाए।
अभ्यर्थी 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और इसलिए जांच सीआईडी को सौंप दी गई है। इससे पहले भी प्रदर्शनकारी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग कर चुके हैं।
हजारीबाग के अभ्यर्थी विनय मेहता ने कहा कि उन्हें सीआईडी जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उनका दावा है कि पहले जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में सीआईडी ने खुद पाया था कि 150 में से 135 सवालों के जवाब पहले ही लीक हो चुके थे और 120 सवाल परीक्षा प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते थे। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्होंने ईमेल और व्हाट्सऐप के जरिए कई दस्तावेजी सबूत भेजे, लेकिन अधिकारियों ने न तो उनकी शिकायतों का जवाब दिया और न ही कार्रवाई की। इसलिए अब वे चाहते हैं कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की समिति से कराई जाए।
प्रदर्शनकारी मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने भी पहुंचे। पलामू के अभ्यर्थी पवन गोस्वामी ने कहा कि शिबू सोरेन उनके प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
इस आंदोलन को कई संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। सोमवार को एआईएसए ने कथित भर्ती घोटालों के खिलाफ अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन किया और 7 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो रविवार रात से केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं।