रांची न्यूज डेस्क: रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में एक महिला बंदी के गर्भवती होने और कथित यौन शोषण के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब पर नाराजगी जताई है। सोमवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और न्यायिक जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने सवाल उठाया कि इतने संवेदनशील मामले में अब तक मेडिकल रिपोर्ट क्यों प्रस्तुत नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसने तीन दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंप दी है। रिपोर्ट में महिला बंदी के साथ किसी प्रकार के यौन उत्पीड़न की घटना से इनकार किया गया है और मामले को अफवाहों पर आधारित बताया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि संबंधित महिला बंदी ने लिखित बयान देकर किसी भी गलत घटना से इनकार किया है और उसे जमानत भी मिल चुकी है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने डीजीपी और आईजी (जेल) की ओर से दाखिल शपथ-पत्र पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जवाब में मामले को टालने का प्रयास दिखाई देता है। अदालत ने टिप्पणी की कि डीजीपी इस मामले को केवल जेल प्रशासन का विषय बताकर अपनी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकतीं। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि जैसे ही मामला न्यायालय के संज्ञान में आया, महिला बंदी को जमानत कैसे मिल गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रांची के न्यायायुक्त से लेकर न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा की गई न्यायिक जांच की रिपोर्ट भी तलब की है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा मुद्दा उठाए जाने और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद झालसा, जिला प्रशासन और जेल प्रशासन स्तर पर भी अलग-अलग जांच कराई गई है। अब हाईकोर्ट 17 जून को अगली सुनवाई में मेडिकल और न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले की आगे समीक्षा करेगा।