रांची न्यूज डेस्क: 26 साल पुराने सड़क हादसे के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने मृतक के परिवार को बड़ी राहत दी है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने मंगलवार को मुआवजे की रकम 10.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 32.72 लाख रुपये कर दी। अदालत ने यह राशि मृतक बिमल लकड़ा की पत्नी और चार बेटियों के बीच बराबर बांटने का निर्देश दिया है।
यह हादसा 19 जून 2000 को हुआ था। रांची से जमशेदपुर जा रही मारुति कार को सामने से आ रहे एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसे में कार चला रहे बिमल लकड़ा की मौके पर ही मौत हो गई थी। निचली अदालत ने दोनों वाहनों के चालकों की 60:40 की साझा लापरवाही मानते हुए परिवार को 10.60 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला किया था।
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बिमल लकड़ा की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने भी बताया था कि ट्रक ने मारुति कार को टक्कर मारी थी। बीमा कंपनी भी बिमल की लापरवाही साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर सकी। अदालत ने मारुति की बीमा पॉलिसी को सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं, बल्कि व्यापक पैकेज पॉलिसी माना।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को भी मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार माना है। बीमा कंपनी को आठ सप्ताह के अंदर बढ़ी हुई मुआवजा राशि जमा करनी होगी। इस रकम पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से सालाना 6 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। अगर छह महीने के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज की दर बढ़कर 8 प्रतिशत सालाना हो जाएगी।