रांची न्यूज डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने दो दशक से संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के पक्ष में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने Indian Institute of Technology (Indian School of Mines), Dhanbad को 20 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि यदि नियमित पद उपलब्ध नहीं हैं तो कर्मचारियों के समायोजन के लिए अधिसंख्य (सुपरन्यूमेरेरी) पद सृजित किए जाएं।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने शक्तिनाथ महतो और छह अन्य कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सभी याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति उनके परिजनों की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर दैनिक वेतनभोगी के रूप में हुई थी। वर्ष 2001 से 2017 तक दैनिक वेतनभोगी के तौर पर काम लेने के बाद उन्हें निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग व्यवस्था में शामिल कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से संस्थान में स्थायी प्रकृति का कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित नहीं किया गया। इस पर अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक लगातार एक ही तरह का कार्य कराया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनकी सेवाओं की आवश्यकता स्थायी है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग की आड़ में कर्मचारियों को वर्षों तक उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कर्मचारियों की पूर्व सेवा अवधि को सेवा निरंतरता और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जोड़ने का निर्देश देते हुए कहा कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना संस्थानों की जिम्मेदारी है।