रांची न्यूज डेस्क: झारखंड कांस्टेबल भर्ती 2015 से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 888 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को निर्देश दिया है कि इन अभ्यर्थियों के दावों पर उपलब्ध रिक्त पदों के विरुद्ध पुनर्विचार किया जाए। यह आदेश उन विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिन्हें झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर किया गया था।
दरअसल, विज्ञापन संख्या 04/2015 के तहत आवेदन करने वाले इन अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा, मेडिकल जांच और दस्तावेज सत्यापन जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली थीं। इसके बावजूद 29 मई 2017 को जारी अंतिम चयन सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। अभ्यर्थियों का दावा था कि होमगार्ड और महिला श्रेणी में पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण कई पद खाली रह गए थे, जिन पर उन्हें नियुक्ति मिलनी चाहिए थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 27 मई 2026 तक झारखंड पुलिस में कुल 2,380 कांस्टेबल पद रिक्त हैं। इनमें 1,168 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि 1,212 पद सामान्य श्रेणी के हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि 888 अभ्यर्थियों के मामलों पर पुनर्विचार करते समय उन्हें अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाए। साथ ही, उनकी वर्तमान आयु को ध्यान में रखते हुए नए मेडिकल और शारीरिक दक्षता परीक्षण आयोजित किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी मेडिकल और फिटनेस परीक्षण में सफल होंगे, उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। उनकी वरिष्ठता वर्तमान कांस्टेबल सूची के अंतिम छोर पर तय होगी, जबकि आपसी वरिष्ठता 2015 की मूल मेरिट सूची के आधार पर निर्धारित की जाएगी। अदालत ने राज्य सरकार और आयोग को 13 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी। इस फैसले को करीब नौ वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।