रांची न्यूज डेस्क: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने गुरुवार को कक्षा 8वीं के बोर्ड रिजल्ट जारी कर दिए हैं, जिसमें राज्य के करीब 93.31% छात्र पास हुए हैं। हालांकि, इस साल का रिजल्ट पिछले साल (2025) के 94.39% के मुकाबले थोड़ा कम रहा है, लेकिन लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारकर अपनी काबिलियत साबित की है। कुल 5.16 लाख से ज्यादा बच्चों में से लगभग 4.81 लाख स्टूडेंट्स सफल रहे हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है।
इस साल के रिजल्ट की सबसे बड़ी 'सक्सेस स्टोरी' रांची जिले की रही है, जिसने पिछले साल 15वें नंबर पर रहने के बाद इस बार सीधे टॉप पर कब्जा जमाया है। रांची का पास प्रतिशत 96.80% रहा, जबकि खूंटी जिला 86.27% के साथ सबसे नीचे पायदान पर खिसक गया। रांची की इस जबरदस्त छलांग के पीछे 'प्रोजेक्ट टीम' की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही थी, जिसमें सिलेबस पूरा करने के बाद बच्चों के सीखने के स्तर पर खास ध्यान दिया गया।
रांची की कामयाबी का असली राज कमजोर बच्चों की पहचान और उनके लिए चलाई गई एक्स्ट्रा क्लासेस में छिपा है। प्री-बोर्ड परीक्षाओं के जरिए पिछड़ रहे बच्चों को चुना गया और उनकी जरूरतों के हिसाब से तैयारी कराई गई। इसके अलावा, फरवरी में बोर्ड एग्जाम की तर्ज पर 3-3 घंटे के मॉक टेस्ट लिए गए, जिससे बच्चों के मन से परीक्षा का डर पूरी तरह निकल गया और वे कॉन्फिडेंस के साथ पेपर दे पाए।
जिलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो रांची के बाद कोडरमा और हजारीबाग का नंबर आता है, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। वहीं जामताड़ा और खूंटी जैसे जिलों का प्रदर्शन इस बार काफी फीका रहा। कुल मिलाकर यह रिजल्ट दिखाता है कि अगर सही रणनीति और एक्स्ट्रा एफर्ट्स डाले जाएं, तो शिक्षा के स्तर में बड़ा सुधार लाया जा सकता है, जैसा कि रांची ने इस साल कर दिखाया।