रांची न्यूज डेस्क: जगन्नाथ मेले की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। मेला 14 जुलाई तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा। 15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ का नेत्रदान कार्यक्रम होगा, जबकि 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। जिला प्रशासन, मंदिर समिति और अन्य संस्थाएं तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
इस बार मेले में कई नए आकर्षण जोड़े गए हैं। पहली बार स्क्रीन टावर झूला लगाया गया है। इसके अलावा ग्रेविटी झूला, जंगल सफारी, रोबोटिक जानवर, जलपरी शो, 90 डिग्री पर घूमने वाला प्रिंस झूला और मीना बाजार भी लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे। मेले में करीब 25 छोटे-बड़े झूले लगाए जा रहे हैं। वहीं, लोहा बाजार के लिए अलग स्थान तय किया गया है।
मेला आयोजकों के अनुसार अब तक 2,000 से अधिक स्टॉल बुक हो चुके हैं। हालांकि, बैरिकेडिंग के कारण इस बार स्टॉल लगाने के लिए जगह कम मिली है। दुकानदारों से 100 रुपये से लेकर 2,000 रुपये प्रति वर्गफीट प्रतिदिन तक शुल्क लिया जा रहा है। कई दुकानदारों ने स्टॉल का किराया अधिक होने पर नाराजगी भी जताई है।
सुरक्षा के लिए इस बार विशेष इंतजाम किए गए हैं। मेले में पांच वॉच टावर और 62 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन ड्रोन से भी निगरानी करेगा। पूरे मेला क्षेत्र में लोहे की बैरिकेडिंग लगाई जा रही है और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए सड़क का एक हिस्सा खाली रखा जाएगा।
इस बार रथयात्रा में एक नई परंपरा भी शुरू होगी। यात्रा के पांचवें दिन मां लक्ष्मी पहली बार पालकी में सवार होकर मौसीबाड़ी जाएंगी। वहीं, मौसीबाड़ी में मां लक्ष्मी का स्थायी मंदिर भी बनाया जा रहा है। मंदिर न्यास समिति का कहना है कि इस बार रथयात्रा को पहले से अधिक भव्य और सुरक्षित बनाने की तैयारी की गई है।