रांची न्यूज डेस्क: इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM) रांची ने मडुआ (रागी) से बनने वाले "मडुआ लड्डू" (Madua Laddoo) को तैयार करने की अपनी विशेष और वैज्ञानिक प्रक्रिया के लिए कॉपीराइट एक्ट, 1957 के तहत भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय से औपचारिक कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन (Copyright Registration) प्राप्त कर लिया है।
संस्थान के अनुसार, इसके लिए 16 मई 2026 को आवेदन किया गया था, जिसका प्रमाण पत्र 22 जुलाई 2026 को जारी किया गया।
इस अनूठे उत्पाद और इसकी मानकीकृत (Standardised) निर्माण प्रक्रिया को आईएचएम रांची के प्राचार्य डॉ. भूपेश कुमार, वरिष्ठ व्याख्याता रवि कुमार और व्याख्याता रजनीश कुमार सिंह ने मिलकर विकसित किया है।
बिना किसी मिलावट के शुद्ध स्वाद: आईएचएम के प्राचार्य डॉ. भूपेश कुमार ने बताया कि यह मडुआ लड्डू केवल मडुआ, देसी घी और चीनी से तैयार किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार का प्रिजर्वेटिव (संरक्षक), एडिटिव या मिलावटी तत्व इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसका स्वाद अनोखा है और यह मुंह में जाते ही घुल जाता है।
पारंपरिक व्यंजनों और शोध को बढ़ावा: संस्थान का मानना है कि इस प्रक्रिया के कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन से संकाय सदस्यों और छात्रों को पारंपरिक व्यंजनों के शोध और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के महत्व को समझने की प्रेरणा मिलेगी।
पोषण और रोजगार के नए अवसर: मडुआ झारखंड की खान-पान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मडुआ आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से न केवल पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण होगा, बल्कि राज्य में पोषण, उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।