रांची न्यूज डेस्क: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का बुधवार को निधन हो गया। गुरुवार को रामगढ़ के नेमरा स्थित उनके पैतृक गांव में संथाली रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया गया। हेमंत सोरेन ने मां को मुखाग्नि दी। इसी बरलंगा घाट पर शिबू सोरेन का भी अंतिम संस्कार हुआ था।
अंतिम संस्कार से पहले रांची के मोरहाबादी स्थित आवास पर रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, सरकार के मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो समेत कई नेता और प्रशासनिक अधिकारी वहां पहुंचे। हेमंत सोरेन ने खुद मां की अर्थी को कंधा दिया और फिर अंतिम यात्रा नेमरा के लिए रवाना हुई।
मोरहाबादी से अंतिम यात्रा ओरमांझी और गोला होते हुए नेमरा पहुंची। रास्ते में सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। पैतृक गांव पहुंचने के बाद हेमंत सोरेन और परिवार के दूसरे सदस्यों ने अर्थी को घाट तक कंधा दिया। अंतिम संस्कार में परिवार के लोगों के अलावा ग्रामीण, झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता-कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए।
शिबू सोरेन के निधन के करीब 14 महीने बाद रूपी सोरेन ने भी दुनिया को अलविदा कहा। परिवार और झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए वह शिबू सोरेन के संघर्ष के दौर की अहम साथी रही थीं। रूपी सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने शोक जताया। प्रधानमंत्री ने हेमंत सोरेन और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रूपी सोरेन ने जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए काम किया था।