रांची न्यूज डेस्क: इस प्रदर्शनी में एक ऐसी मशीन लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी, जो देखने में किसी बड़ी बंदूक जैसी लगती है, लेकिन इसका काम आंखों के रेटिना की तस्वीर लेना है। रेडिमो कंपनी के दिलीप ने बताया कि इस मशीन को दिखाने के लिए उन्हें खास तौर पर बुलाया गया है। यह मशीन छोटी और पोर्टेबल है, यानी इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
दिलीप के मुताबिक, इस मशीन की मदद से आंखों के रेटिना की तस्वीर ली जाती है। इसमें खास लेंस के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि एआई रेटिना को स्कैन करके भविष्य में क्रॉनिक किडनी फेलियर, हार्ट फेलियर और दिल से जुड़ी दूसरी बीमारियों के जोखिम का पता लगाने में मदद कर सकती है।
दिलीप ने बताया कि यह मशीन करीब 30 सेकंड में तस्वीर लेकर उसकी रिपोर्ट मोबाइल फोन पर उपलब्ध करा देती है। इससे व्यक्ति अपने फोन पर ही आंखों की जांच से जुड़ी जानकारी देख सकता है। उन्होंने कहा कि आंखों की रक्त वाहिकाओं और रेटिना में दिखने वाले बदलाव शरीर की कुछ बीमारियों के संकेत दे सकते हैं।
इस तकनीक का मकसद बीमारियों के जोखिम का पहले ही पता लगाकर लोगों को समय रहते जांच और इलाज के लिए जागरूक करना है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति में भविष्य में किडनी की बीमारी का जोखिम सामने आता है, तो वह ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच करा सकता है और डॉक्टर की निगरानी में रह सकता है। हालांकि, ऐसी मशीन से मिले नतीजों को बीमारी की पक्की पुष्टि नहीं माना जा सकता। सही जांच और इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होगी।
दिलीप ने बताया कि फिलहाल यह मशीन रांची में उपलब्ध नहीं है, लेकिन कंपनी जल्द ही इसे वहां लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।