रांची न्यूज डेस्क: झारखंड के धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड में पेयजल में फ्लोराइड की खतरनाक मात्रा ने हजारों लोगों की सेहत पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। एक हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि घरबर पंचायत के कई जलस्रोतों में फ्लोराइड का स्तर निर्धारित सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है, जिससे करीब 14 हजार से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं।
कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल स्टडीज और गैर-सरकारी संस्था मेघ पाइन अभियान द्वारा किए गए अध्ययन में छह गांवों के 315 पेयजल स्रोतों की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 36 प्रतिशत से अधिक जलस्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा से ज्यादा पाई गई। कुछ स्थानों पर यह स्तर 16.2 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज किया गया, जो सामान्य सीमा से लगभग 10 गुना अधिक है।
शोधकर्ताओं ने 162 लोगों के मूत्र नमूनों और 60 स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य जांच भी की। जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों के शरीर में फ्लोराइड का स्तर अत्यधिक बढ़ चुका है। लगभग आधे बच्चों में दंत फ्लोरोसिस और अस्थि फ्लोरोसिस के लक्षण मिले हैं। इसके अलावा दांतों का रंग बदलना, हड्डियों में दर्द, जोड़ों की समस्या और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आई हैं।
अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि फ्लोराइड प्रदूषण का स्रोत औद्योगिक नहीं बल्कि प्राकृतिक भूगर्भीय संरचनाएं हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, छोटानागपुर पठार की चट्टानों और मिट्टी से निकलने वाला फ्लोराइड भूजल में मिल रहा है। ऐसे में केवल नए बोरवेल खोदना समाधान नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि हर जलस्रोत की जांच और प्रमाणन के बाद ही उसे पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।