रांची न्यूज डेस्क: रांची स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) में प्रथम वर्ष के एक छात्र की आत्महत्या से मौत के मामले की जांच के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई है। यह कमेटी घटना के हालात की जांच करने के साथ यह भी देखेगी कि संस्थान में छात्रों की मानसिक और भावनात्मक सेहत से जुड़ी गाइडलाइंस का पालन किया जा रहा था या नहीं। 10 अक्टूबर की रात छात्र की मौत के बाद से ही संस्थान में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने समय पर इमरजेंसी मेडिकल सहायता उपलब्ध नहीं कराई। वे संस्थान के निदेशक राजीव श्रीवास्तव के इस्तीफे और कैंपस में बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी
शिक्षा मंत्रालय ने 12 अक्टूबर को आदेश जारी कर इस कमेटी का गठन किया। इसकी अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर रजनी अब्बी करेंगी। कमेटी में दिल्ली के मूलचंद अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल और मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव हीरा लाल पूनिया भी शामिल हैं। कमेटी को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इसमें जुलाई 2023 में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जारी छात्रों की मानसिक और भावनात्मक सेहत से जुड़ी गाइडलाइंस के पालन की समीक्षा की जाएगी।
मेडिकल सुविधाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था की भी होगी जांच
कमेटी कैंपस में बुनियादी सुविधाओं, छात्रों को मिलने वाली संस्थागत मदद, काउंसलिंग और मेंटरशिप की व्यवस्था के साथ शिकायतों के समाधान के तरीकों की भी जांच करेगी। इसका मकसद यह पता लगाना है कि छात्रों की मानसिक परेशानी को समय रहते पहचानने और मदद पहुंचाने में कहां कमी रह गई। मंत्रालय के मुताबिक, कमेटी व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी। साथ ही, ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने और छात्रों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सुझाव देगी। मंत्रालय ने कहा है कि कमेटी जरूरत के मुताबिक संबंधित लोगों से बातचीत करेगी और दस्तावेजों की जांच करेगी। संस्थान का कामकाज सुचारु रखने के लिए अंतरिम प्रशासनिक इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
प्रदर्शन के कारण परीक्षाएं भी प्रभावित
संस्थान के रजिस्ट्रार मुनुरेन सैमसन चांपिया के मुताबिक, छात्रों का विरोध शांत कराने के लिए संस्थान के अध्यक्ष ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर उनसे बातचीत की कोशिश की थी। हालांकि, औपचारिक चर्चा शुरू होने से पहले ही गतिरोध पैदा हो गया। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर से शुरू हुई परीक्षाएं सोमवार को विरोध प्रदर्शन के कारण नहीं हो सकीं। छात्र की मौत का पता शनिवार रात चला, जब हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने उसका कमरा अंदर से बंद पाया और अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद प्रशासन ने पुलिस को मामले की जानकारी दी।
खेलगांव थाना प्रभारी निर्भय कुमार ने बताया कि मामले में अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज किया गया है और घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। उनके मुताबिक, छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांगों और संस्थान प्रबंधन के जवाब से जुड़ा मामला संस्थान के आंतरिक स्तर पर विचाराधीन है।
2016 में हुई थी संस्थान की स्थापना
आईआईआईटी-रांची की स्थापना 2016 में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और उद्योग जगत के साझेदारों के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत हुई थी। यहां कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग के साथ डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एम्बेडेड सिस्टम और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे विषयों में पढ़ाई होती है। संस्थान में एमटेक और पीएचडी के कार्यक्रम भी चलते हैं। फिलहाल संस्थान का संचालन रांची के गेतलातू स्थित बीएसएनएल के एआरटीटीसी कैंपस से होता है, जबकि छात्रों के हॉस्टल खेलगांव के नेशनल गेम्स हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में हैं। संस्थान का स्थायी कैंपस रांची के कांके क्षेत्र के सांगा गांव में विकसित किया जा रहा है।