रांची न्यूज डेस्क: रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में मेडिकल सीट आवंटन और नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। इसी सिलसिले में सीआईडी की एक टीम रिम्स पहुंची और डीन कार्यालय समेत कई विभागों में दस्तावेजों की गहन जांच की। यह कार्रवाई पिछले शैक्षणिक सत्र में हुए नामांकन को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर की जा रही है, जिनमें फर्जी जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों के जरिए अयोग्य अभ्यर्थियों को प्रवेश देने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच के दौरान सीआईडी अधिकारियों ने नामांकन प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले, जबकि दूसरी टीम ने निदेशक कार्यालय में टेंडर आवंटन से संबंधित फाइलों की जांच की। आरोप है कि कुछ ठेके ऐसे पक्षों को दिए गए, जो निर्धारित पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। जांच एजेंसी ने रिम्स प्रबंधन से अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे हैं और आने वाले दिनों में मामले में और कार्रवाई की संभावना है।
झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिले के मामलों के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिछले वर्ष सीआईडी जांच के आदेश दिए थे। रिम्स के डीन डॉ. डी.के. सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2025 में एक छात्रा का प्रवेश फर्जी जाति प्रमाण पत्र मिलने पर रद्द कर दिया गया था। वहीं पाकुड़ जिले के एक अन्य छात्र के मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि एक छात्र के दिव्यांगता प्रमाण पत्र की भी जांच की गई थी, जो सही पाया गया।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर होने वाले दाखिलों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। उन्होंने बताया कि सीआईडी को वर्ष 2025 में सरकारी और निजी दोनों मेडिकल कॉलेजों में हुए सभी प्रवेशों की जांच करने का निर्देश दिया गया है। मंत्री ने कहा कि जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।