रांची न्यूज डेस्क: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के करेन और रांची समुदायों के बच्चों के लिए समुद्र केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। पीढ़ियों से उनके पिता और दादा समुद्र की लहरों, मौसम के संकेतों और समुद्री जीवों की गतिविधियों को पढ़ने की अद्भुत क्षमता रखते थे। यह पारंपरिक ज्ञान उनके जीवन और संस्कृति का हिस्सा था, लेकिन लंबे समय तक इससे आर्थिक लाभ या पेशेवर अवसर नहीं जुड़ पाए थे।
अब हैवलॉक द्वीप (स्वराज द्वीप) में यह स्थिति तेजी से बदल रही है। मछुआरों और नाविक परिवारों की नई पीढ़ी अपने समुद्री अनुभव और पारंपरिक ज्ञान को पेशेवर कौशल में बदल रही है। युवा अब डाइविंग इंस्ट्रक्टर, मरीन गाइड और स्कूबा डाइविंग विशेषज्ञ बनकर पर्यटन उद्योग में नई पहचान बना रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि पूरे समुदाय के सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
इस बदलाव के पीछे कई स्थानीय और पेशेवर संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इनमें पूनम दर्ने और उनके पति डी. संतोष द्वारा स्थापित ‘जिप्सी डाइवर्स’ प्रमुख है। हैवलॉक द्वीप के बीच नंबर-2 पर स्थित यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय डाइविंग संगठन PADI (प्रोफेशनल एसोसिएशन ऑफ डाइविंग इंस्ट्रक्टर्स) से संबद्ध फाइव-स्टार डाइव स्कूल और रिसॉर्ट है। यह स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें वैश्विक स्तर की डाइविंग और समुद्री पर्यटन सेवाओं से जोड़ रहा है।
स्थानीय युवाओं के लिए यह केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक विरासत को नए रूप में आगे बढ़ाने का अवसर भी बन गया है। समुद्र से मिला पीढ़ियों पुराना ज्ञान अब उन्हें आत्मनिर्भरता, सम्मानजनक करियर और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ा रहा है, जिससे अंडमान के कई परिवारों की जिंदगी में नया बदलाव आ रहा है।