रांची न्यूज डेस्क: राज्य के कृषि विभाग ने किसानों की फसलों को मौसम और दूसरी समस्याओं से बचाने के लिए हर जिले में ‘फसल रक्षक’ (एफआर) रखने का फैसला किया है। हर जिले में कम से कम दो फसल रक्षक नियुक्त किए जाएंगे। विभाग ने सभी जिला मुख्यालयों को भर्ती के निर्देश दे दिए हैं और करीब एक महीने में पूरी प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
यह पहल ऐसे समय में की जा रही है, जब खरीफ सीजन में लगातार बारिश के कारण कई जिलों में फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। ज्यादा बारिश के साथ फसलों में फंगल इंफेक्शन, कीटों का हमला और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में फसल रक्षक किसानों को मौके पर ही सही तकनीकी सलाह देने में मदद करेंगे।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक (क्रॉप प्रोटेक्शन) अशोक सम्राट ने बताया कि कई बार किसान फसल खराब होने की असली वजह तुरंत समझ नहीं पाते। फसल रक्षक स्थानीय स्तर पर तकनीकी सलाहकार की तरह काम करेंगे और खेतों तक वैज्ञानिक जानकारी और जरूरी मदद पहुंचाएंगे। स्थानीय लोगों की नियुक्ति से गांवों और दूरदराज के इलाकों में किसानों के साथ बेहतर संपर्क और बातचीत भी हो सकेगी।
फसल रक्षकों का काम खेतों में जाकर खड़ी फसलों की स्थिति का जायजा लेना और उनकी सेहत पर नजर रखना होगा। इसके अलावा वे स्थानीय कृषि बाजारों में बिकने वाले कीटनाशक, पेस्टिसाइड और खाद की गुणवत्ता और सही कीमत की भी जांच करेंगे। नियुक्ति के बाद विभागीय अधिकारी उन्हें ट्रेनिंग देंगे और वे कृषि विशेषज्ञों के संपर्क में रहेंगे, ताकि समय के साथ उनकी फसल संबंधी समस्याओं की पहचान करने की क्षमता बेहतर हो सके। विभाग का लक्ष्य गांव-गांव ऐसे विशेषज्ञों की टीम तैयार करना है, जो जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत मदद दे सके और फसल की पैदावार को बचाने में मदद करे।