रांची न्यूज डेस्क: झारखंड में सरकारी खजाने से अवैध निकासी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। बोकारो और हजारीबाग के बाद अब रांची ट्रेजरी से भी 2.94 करोड़ रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया है। यह घोटाला पशुपालन विभाग के अंतर्गत आने वाले कांके स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन' में हुआ है। रांची डीसी के निर्देश पर मजिस्ट्रेट मोहम्मद जफर हसनात ने कोतवाली थाने में संस्थान के दो कर्मचारियों, मुनिंद्र कुमार और संजीव कुमार के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मुनिंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने सरकारी 'कुबेर पोर्टल' के साथ छेड़छाड़ कर इस हेराफेरी को अंजाम दिया। वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 के बीच, इन कर्मचारियों ने डिजिटल सिस्टम में सेंध लगाकर अपने मूल वेतन को अवैध रूप से कई गुना बढ़ाकर दिखाया। मुनिंद्र ने अपने दो बैंक खातों में 1.52 करोड़ रुपये और संजीव ने 1.41 करोड़ रुपये अवैध रूप से ट्रांसफर कर लिए। 13 अप्रैल को सौंपी गई 67 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट में इस संगठित जालसाजी के पुख्ता सबूत पेश किए गए हैं।
दूसरी ओर, हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले की परतें भी खुलती जा रही हैं। यहां के मुख्य आरोपी सिपाही शंभु कुमार द्वारा अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों का ब्यौरा सामने आया है। जांच टीम को पता चला है कि शंभु ने हजारीबाग एसपी कोठी के पीछे एक प्रतिबंधित 'खासमहल' जमीन पर बिना किसी वैध लीज के तीन मंजिला आलीशान भवन खड़ा कर दिया है। जिला प्रशासन ने इस विवादित भूमि को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और भवन पर नोटिस चस्पा कर जवाब मांगा है।
आरोपी शंभु कुमार के वित्तीय साम्राज्य की जांच में पाया गया है कि उसने हजारीबाग और बिहार के गया में करीब 8 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति अर्जित की है। गया में खरीदी गई व्यावसायिक और कृषि भूमि से संबंधित 9 महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियां अब शंभु के रिश्तेदारों और सहयोगियों से जुड़े 21 संदिग्ध बैंक खातों के माध्यम से हुए करोड़ों के लेन-देन की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं ताकि इस घोटाले के पीछे छिपे अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।