रांची न्यूज डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो की छह साल से लापता किशोरी के मामले में जांच की धीमी रफ्तार पर कड़ी नाराजगी जताई है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए सीबीआई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया।
यह मामला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान सीआईडी और सीबीआई ने जांच की मौजूदा स्थिति अदालत के सामने रखी। उपलब्ध साक्ष्यों और अब तक उठाए गए कदमों की समीक्षा करने के बाद कोर्ट ने जांच की दिशा और प्रगति पर कई सवाल उठाए।
खंडपीठ ने पूछा कि आखिर 2020 से लापता किशोरी का अब तक कोई पता क्यों नहीं चल पाया और जांच को नतीजे तक पहुंचाने के लिए एजेंसियां आगे क्या ठोस कदम उठा रही हैं। इसी के मद्देनजर अदालत ने सीबीआई एसपी को मंगलवार दोपहर 2:15 बजे होने वाली अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर पूरी जांच की जानकारी देने का निर्देश दिया है।
यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है, जहां 16 अक्टूबर 2020 को 14 वर्षीय किशोरी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे अपहरण का मामला माना गया था। घटनास्थल से किशोरी की साइकिल, चप्पल और किताबें मिली थीं, लेकिन वर्षों बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
इससे पहले हाईकोर्ट सीबीआई को जांच में शामिल होने का निर्देश दे चुका है और सीआईडी के साथ समन्वय बनाकर जांच आगे बढ़ाने को कहा था। सुनवाई के दौरान सीआईडी ने अदालत को बताया था कि ई-केवाईसी मिलान के दौरान बिहार के गोपालगंज में एक बच्ची का चेहरा लापता किशोरी से करीब 90 प्रतिशत मिलता-जुलता पाया गया था। हालांकि, अंगूठे के निशान और अन्य पहचान संबंधी जानकारी मेल नहीं खाने के कारण उसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि इतने संवेदनशील मामले में जांच में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती और एजेंसियों को जल्द से जल्द ठोस नतीजे तक पहुंचने के लिए प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।