रांची न्यूज डेस्क: रांची में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कहीं शेयर बाजार में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर पैसे ऐंठे जा रहे हैं, तो कहीं मोबाइल हैक करके बैंक खातों से रकम निकाल ली जा रही है। कुछ पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने न तो ओटीपी किसी को बताया और न ही बैंक से जुड़ी जानकारी साझा की, इसके बावजूद उनके खाते से पैसे निकल गए। अब साइबर ठगी सिर्फ फर्जी कॉल या संदिग्ध लिंक तक सीमित नहीं है। ठग लोगों का भरोसा जीतने, मोबाइल तक पहुंच बनाने और पुलिस या जांच एजेंसियों के नाम पर डराने जैसे तरीके भी अपना रहे हैं।
सितंबर में कांके के गागी गांव के रहने वाले मंगरा उरांव से शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 9.20 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया। प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपी ने खुद को बैंक अधिकारी बताया और ज्यादा मुनाफे का भरोसा देकर उनसे पैसे ट्रांसफर करा लिए। वहीं, 19 सितंबर को कोकर के तिरिल तालाब निवासी राजेंद्र राम ने शिकायत की कि ऑनलाइन सिस्टम अपडेट से जुड़ा मैसेज खोलने के बाद उनका मोबाइल हैक हो गया और खाते से 98 हजार रुपये निकल गए। इसी महीने गाड़ीखाना के कार्ट सराय रोड निवासी राजकुमार वर्मा के दो बैंक खातों से भी कुल 98 हजार रुपये निकाले गए। पहले खाते से 17 हजार और दूसरे से 81 हजार रुपये की निकासी हुई। इन तीनों मामलों की शिकायत साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई गई।
जुलाई में तीन मामलों में 18.68 लाख रुपये की ठगी
जुलाई में रांची में साइबर ठगी के तीन मामलों में लोगों ने कुल 18.68 लाख रुपये गंवाने की शिकायत की। एक व्यक्ति को ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 9.80 लाख रुपये का चूना लगाया गया। वहीं, एक युवती को टेलीग्राम पर 40 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर 2.77 लाख रुपये ठगे गए। एक अन्य महिला से विदेशी मुद्रा और कस्टम ड्यूटी के नाम पर 6.11 लाख रुपये की ठगी हुई। निवेश से जुड़े ऐसे मामलों में ठग फर्जी प्रोफाइल और नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों का भरोसा जीतते हैं। आकर्षक रिटर्न का लालच देकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा कराए जाते हैं।
डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर भी डराने की कोशिश
अक्टूबर की शुरुआत में रांची में एक बुजुर्ग को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर छह दिनों तक डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाने का मामला सामने आया। ठगों ने धनशोधन के केस में फंसाने की धमकी देकर करीब 20.70 लाख रुपये ठगने की कोशिश की, लेकिन बैंक मैनेजर की सतर्कता से रकम बच गई। ऐसे मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। फिर गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
तीन महीने में 74.59 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायतें
झारखंड सीआईडी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले तीन महीनों में राज्यभर से साइबर धोखाधड़ी की 6,610 शिकायतें मिलीं। इनमें ठगी की कुल रकम 74.59 करोड़ रुपये बताई गई। इसी दौरान पुलिस ने अलग-अलग बैंक खातों में 14.52 करोड़ रुपये फ्रीज कराए और अदालतों के जरिए शिकायतकर्ताओं को 16.98 लाख रुपये वापस दिलाए। इस अवधि में राज्य के साइबर थानों में 222 प्राथमिकी दर्ज हुईं। सीआईडी के मुताबिक, निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। शिकायत दर्ज कराने में देरी होने पर ठगी की रकम कई खातों से आगे भेज दी जाती है, जिससे उसे रोकना मुश्किल हो जाता है।
ठगी का पता चलते ही तुरंत करें शिकायत
शेयर बाजार में निवेश का लालच देने से लेकर मोबाइल हैक करने और डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाने तक, साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में समय पर शिकायत करना बेहद जरूरी है। ठगी का पता चलते ही बैंक को जानकारी दें, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और कॉल, मैसेज, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे डिजिटल सबूत संभालकर रखें। शुरुआती घंटों में शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।