हालांकि, समय के साथ इस कीमती जमीन के कब्जे, मालिकाना हक और इसके वाणिज्यिक उपयोग को लेकर मुंबई नगर निगम और संबंधित निजी डेवलपर्स के बीच अदालती लड़ाई शुरू हो गई। इस कानूनी खींचतान के कारण परियोजना का काम ठप सा पड़ गया और आम जनता को मिलने वाली सुविधा में भारी विलंब हुआ। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों के साथ अदालतों का दरवाजा खटखटाया, जिससे यह मामला वर्षों तक लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझा रहा।
इस बीच, मामले की गंभीरता को देखते हुए अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में बेहद अहम निर्देश जारी किए। सर्वोच्च न्यायालय के इन निर्देशों ने इस विवाद को सुलझाने और अटके हुए बस डिपो के निर्माण कार्य को गति देने की दिशा में एक नई उम्मीद जगाई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और निर्देशों के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि बीएमसी और प्रशासन जल्द ही जनता के हित में इस जमीन पर बस डिपो के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाएंगे, जिससे बोरीवली के निवासियों को बड़ी राहत मिल सकेगी और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।