रांची न्यूज डेस्क: रांची में वर्षों से अधर में लटका अर्बन हाट प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि झारखंड के कारीगरों, ग्रामीण उत्पादकों और छोटे कारोबारियों के लिए एक स्थायी बाजार विकसित किया जाए। इस मांग के बाद राजधानी में लंबे समय से बंद पड़े अर्बन हाट को लेकर बहस तेज हो गई है।
चैंबर के उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने कहा कि अर्बन हाट झारखंड के लिए एक बड़ा सांस्कृतिक और व्यावसायिक केंद्र बन सकता है। उनके मुताबिक राज्य के अलग-अलग जिलों से आने वाले कारीगर यहां अपने हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद और खानपान की चीजें बेच सकेंगे। इससे न सिर्फ स्थानीय कलाकारों और छोटे व्यापारियों को पहचान मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
रांची के कांके डैम के पास वर्ष 2016 में दिल्ली हाट की तर्ज पर इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। करीब 54 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट पर अब तक लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण के बावजूद यह जगह आज तक शुरू नहीं हो सकी। उद्देश्य था कि यहां झारखंड की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए स्थायी रोजगार का अवसर तैयार किया जाए।
कांके डैम के पास बांस से बने सामान बेचने वाले दुकानदार रमेश साहू का कहना है कि सड़क किनारे दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों को बार-बार हटाया जाता है, लेकिन उनके लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती। वहीं वार्ड पार्षद नकुल तिर्की ने कहा कि अगर अर्बन हाट को जल्द शुरू नहीं किया गया, तो कम से कम एक व्यवस्थित वेंडर मार्केट बनाया जाना चाहिए, ताकि सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों को नियमित स्थान मिल सके और शहर में अतिक्रमण की समस्या भी कम हो।