रांची न्यूज डेस्क: रांची के कांके क्षेत्र में बैंगन की खेती के क्षेत्र में मनोज महतो ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पारंपरिक बीज पद्धति को छोड़कर उन्होंने ग्राफ्टिंग (कलम विधि) तकनीक अपनाई है, जिसके परिणामस्वरूप एक ही पौधे से 4 से 5 किलो तक बैंगन प्राप्त हो रहे हैं। इस तकनीक से उनकी आय में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है और आसपास के किसान भी इसे अपनाने के लिए उनके पास आ रहे हैं।
जंगली कुटमा और बैंगन का अनोखा संगम
मनोज बताते हैं कि वे सीधे बीज नहीं लगाते, बल्कि ग्राफ्टेड पौधों का उपयोग करते हैं। इसके लिए पहले जंगली कुटमा की टहनी ली जाती है और उन्नत किस्म के बैंगन की टहनी को कलम विधि से इसके साथ जोड़ा जाता है। इस संयुक्त पौधे को बालू में तैयार कर खेत में रोपा जाता है। जंगली कुटमा की मजबूत जड़ें पौधे की सहनशक्ति बढ़ाती हैं, जिससे बैंगन जल्दी सूखता या मरता नहीं है।
पानी की बचत और खरपतवार से सुरक्षा
खेती को अधिक मुनाफे वाला बनाने के लिए मनोज मल्चिंग पेपर का इस्तेमाल करते हैं। इससे पॉइंट टू पॉइंट सिंचाई संभव होती है और पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। पेपर के कारण अनावश्यक घास नहीं उगती, मिट्टी के पोषक तत्व सिर्फ मुख्य पौधे को मिलते हैं, और खाद व दवाइयां सीधे जड़ों तक पहुंचती हैं।
जैविक खाद और कीट नियंत्रण
कीटों से बचाव के लिए मनोज रसायनों के बजाय जैविक समाधानों पर भरोसा करते हैं। वे सूखे गोबर, नीम के उबले पानी और केंचुआ खाद का प्रयोग करते हैं। यूरिया का उपयोग कम से कम करते हैं और मिट्टी की नमी पूरी तरह सूखने के बाद ही सिंचाई करते हैं।
कमाई का गणित
ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार बैंगन दिखने में सुंदर और चमकदार होते हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है। मनोज हर दूसरे-तीसरे दिन लगभग ₹2000 के बैंगन बेचते हैं। उनकी सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी इस तकनीक को सीखने के लिए उनके पास आने लगे हैं।